नई दिल्ली।RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज देश की अर्थव्यस्था के लिए बड़े ऐलान किए। दरअसल कोरोना वायरस के चलते देश में जो लॉकडाउन है उसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। देश में औद्योगिक उत्पादन लगभग ठप है, बैंकिंग ट्रांजेक्शन गिरे हैं और लोगों को अपनी ईएमआई चुकाने की चिंता सता रही है। ऐसे में आरबीआई ने आज राहत के लिए जो ऐलान किए हैं उसका सकारात्मक असर बैंकों से लेकर इंडस्ट्री और आम लोगों पर भी होगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोरोनो वायरस को देखते हुए एमपीसी यानी मौद्रिक नीति समिति की बैठक पहले कर ली गई है और इसे 24, 36 और 27 मार्च को पूरा किया गया है। इसके साथ ही क्रेडिट पॉलिसी के जो ऐलान 3 अप्रैल को होने थे वो आज ही कर लिए गए हैं।


कैश रिजर्व रेश्यो को 1 फीसदी या 100 बेसिस पॉइंट घटाकर 4 फीसदी से 3 फीसदी कर दिया गया है। इसके बाद पूरे एक साल के लिए बैंको का कैश रिजर्व रेश्यो 3 फीसदी पर रहेगा। इससे बैंकों के पास 1.37 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम रहेगी।

आरबीआई ने लिक्विडिटी एडजेस्टमेंट फैसिलिटी को 0.90 फीसदी घटाकर 4 फीसदी कर दिया है जिससे सिस्टम में और ज्यादा लिक्विडिटी का रास्ता साफ हो सकेगा।
आरबीआई ने बैंकों के लिए लोन-रीपेमेंट नियमों में ढील दी है और इसका विस्तृत विवरण आरबीआई के नोटिफिकेशन में है।
आरबीआई ने कहा कि मार्जिन स्टेंडिंग फैसिलिटी कैप 2 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी की गई है, इसके साथ ही नेट फंडिंग रेश्यो नियम को 6 महीने के लिए टाला जा रहा है। इससे बैंकों के एनपीए इस मुश्किल समय में नहीं बढ़ेंगे जो कि पिछले काफी समय से समस्या बने हुए हैं।
आरबीआई गवर्नर ने जानकारी दी कि सिस्टम में पिछली एमपीसी बैठक से लेकर अबतक 2.8 लाख करोड़ रुपये डाले गए हैं। लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए ये फैसले लिए जा रहे हैं।
शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है लिहाजा बैंकों के ग्राहकों को चिंतित होने की कोई जरुरत नहीं है। बैंकिग सिस्टम को दुरुस्त बनाए रखने के लिए आरबीआई लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आर्थिक स्थिरता पर आरबीआई का फोकस है।
आरबीआई गवर्नर ने एक बार फिर डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कहा कि इस कठिन समय में लोगों को सुरक्षित रहने के लिए जो भी उपाय करने हों, वो उन्हें करने चाहिए।
















