अन्य देशों की तरह क्या भारत रोक पाएंगा सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी खबरें

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सोशल मीडिया साइट्स पर फैल रही झूठी खबरों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने इसके लिए केंद्र सरकार को 3 हफ्ते का वक्त दिया है। इन तीन हफ्ते में केंद्र को सोशल मीडिया के जरिए फैलाने वाली फेक न्यूज पर लगाम कसने के लिए गाइलाइंस बनाने की खातिर एक निश्र्चित टाइमलाइन के साथ ऐफिडेविट फाइल करना है। यह कोर्ट का निर्देश ऑनलाइन अफवाहों और फेक विडियोज के कारण हुईं हालिया घटनाओं के बाद आया है।

आइए जानते हैं कि दुनिया के दूसरे मुल्क सोशल मीडिया पर फैलाने वाली फेक न्यूज से कैसे निपट रहे हैं।

मलेशिया में 85 लाख का जुर्माना या 6 साल तक की जेल

मलेशिया दुनिया के उन अग्रणी देशों में से एक है, जिसने फेक न्यूज रोकने के लिए सख्त कानून (Anti Fake News Law) बनाया है। मलेशिया में ये कानून पिछले साल ही लागू किया गया है। मलेशिया में फेक न्यूज फैलाने पर 5,00,000 मलेशियन रिंग्गित का जुर्माना या छह साल की जेल अथवा दोनों का प्रवाधान है।

ऑस्ट्रेलिया में कंपनी के टर्नओवर का 10% तक जुर्माना

ऑस्ट्रेलिया ने इस साल की शुरुआत में एक कानून पास किया है, जिसमें सोशल मीडिया से आतंकवाद, मर्डर, रेप या किसी दूसरे गंभीर अपराध से जुड़ा कंटेंट हटाने में नाकाम रहने पर कंपनी के टर्नओवर का 10 फीसदी तक जुर्माना और उसके एग्जिक्यूटिव को 3 साल तक की जेल हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में संबंधित कानून से जुड़े नियमों का पालन न करने पर आम लोगों को 1,68,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 80 लाख रुपये) और कंपनियों को 4 करोड़ रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है।

जर्मनी में लग सकता है 40 करोड़ तक का फाइन

यहां फेक न्यूज रोकने के लिए जर्मनी का नेटवर्क इन्फोर्समेंट एक्ट (Germany’s Network Enforcement Act) या नेट्जडीजी (NetzDG) कानून लागू है। ये कानून यहां की सभी कंपनियों और दो लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड सोशल मीडिया यूजर्स पर लागू होता है। कानून के तहत कंपनियों को कंटेंट संबंधी शिकायतों का रिव्यू करना आवश्यक है। अगर रिव्यू में कंटेंट गलत या गैरकानूनी पाया जाता है तो उसे 24 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है। फेक न्यूज फैलाने वाले किसी व्यक्ति पर 50 लाख यूरो (38.83 करोड़ रुपये) और किसी निगम अथवा संगठन पर 5 करोड़ यूरो (388.37 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ये कानून उन लोगों पर भी लागू होता है जो इंटरनेट पर नफरत भरे भाषण वायरल करते हैं। जर्मनी ने एक जनवरी 2018 को ये कानून लागू किया है।

भारत में क्यों मुश्किल है नियंत्रण

यहां फेक न्यूज रोकने के लिए जर्मनी का नेटवर्क इन्फोर्समेंट एक्ट (Germany’s Network Enforcement Act) या नेट्जडीजी (NetzDG) कानून लागू है। ये कानून यहां की सभी कंपनियों और दो लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड सोशल मीडिया यूजर्स पर लागू होता है। कानून के तहत कंपनियों को कंटेंट संबंधी शिकायतों का रिव्यू करना आवश्यक है। अगर रिव्यू में कंटेंट गलत या गैरकानूनी पाया जाता है तो उसे 24 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है। फेक न्यूज फैलाने वाले किसी व्यक्ति पर 50 लाख यूरो (38.83 करोड़ रुपये) और किसी निगम अथवा संगठन पर 5 करोड़ यूरो (388.37 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ये कानून उन लोगों पर भी लागू होता है जो इंटरनेट पर नफरत भरे भाषण वायरल करते हैं। जर्मनी ने एक जनवरी 2018 को ये कानून लागू किया है।

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