जीएसटी (GST) रिटर्न कैसे भरे ? – GST return kaise bhare live demo hindi

GST को लेकर अटकलों का बाज़ार शांत हो चुका है और 1 जुलाई 2017 से GST भारत में लागू हो गया है. भारत में अब तक जितने भी कर सुधार हुए है उनमे GST एक सबसे बड़ा कर सुधार है. इस कर सुधार ने तो भारत में एक नवीन क्रांति को ही जन्म दे दिया है. GST को लेकर सभी तरह के विवादों और चर्चाओं को विराम तो मिल चुका है लेकिन इस कर ने एक नवीन प्रश्न को जरूर जन्म दिया है कि GST लगने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में क्या परिवर्तन आएगा ? GST से करदाताओं, कारोबारियों और उपभोक्ताओं को क्या लाभ और राहत मिलेगा ? और सबसे महत्वपूर्ण बात जो कारोबारियों को परेशान कर रही है वो ये है कि

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GST की रिटर्न कैसे भरते है ? तो दोस्तों फिलहाल तो आज हम आपको ये बताने की कोशिश कर रहे है कि GST रिटर्न कैसे भरा जाता है.

GST के मौजूदा प्रारूप के अनुसार हर तीसरे महीने आपको GST की रिटर्न अनिवार्य रूप से फाइल करना होगा. GST से सम्बंधित किसी भी तरह की धोखाधड़ी करने पर अधिकतम ५ साल की जेल का प्रावधान है. हम सब ये बात अच्छी तरह से जानते है कि देश की मजबूत अर्थव्यवस्था में छोटे, मझौले और बड़े कारोबारियों का सभी का बराबर योगदान है. हालांकि अभी तक छोटे-बड़े कोई भी कारोबारी GST की अवधारणा से पूरी तरह से परिचित नहीं हो पाए है इसीलिए GST को समझने में अभी कुछ वक़्त तो लगेगा.  GST के लागू होने से पहले देखा जाए तो व्यापारियों का कुछ वर्ग ऐसा भी होता था जो कि समय पर कर अदा नहीं करता था या फिर कर की चोरी कर लेता था लेकिन GST के लागू होने के बाद अब ऐसा नहीं हो पायेगा. अब यदि व्यापारी समय पर कर नहीं देगा या अपने व्यापार और आय-व्यय का ब्यौरा नहीं देगा तो आयकर विभाग की तरफ से उन्हें नोटिस भेजा जाएगा. इसके अतिरिक्त उसे ब्याज, विलम्ब शुल्क और अर्थ दंड भी देना होगा.

अब से प्रत्येक व्यापारी को हर महीने की १० तारीख़ को पिछले माह के अपने कारोबार की जानकारी GST पोर्टल पर देनी होगी. इसके लिए आपको अपने कारोबार की जानकारी GSTR-1 फॉर्म में देनी होंगी.

GSTR-1  : इस फॉर्म को GST रिटर्न फॉर्म भी कहते है. इसी फॉर्म में आपको अपनी वस्तु एवं सेवा कर की जानकारी देनी होगी. मान लीजिये कि आपने पिछले माह कुल २.५ लाख या इससे अधिक का कारोबार किया और वस्तु और सेवाओं का आदान-प्रदान दुसरे राज्य में किया गया है तो आपको प्रत्येक माल की पक्की रसीद का ब्यौरा देना होगा.

FORM GSTR-6: प्रत्येक माह कि १३ तारीख़ को इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर को अपनी सर्विस की पूरी जानकरी FORM GSTR-6 के माध्यम से GST के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है.

FORM GSTR-2 : हर महीने की १५ तारीख़ को जिस कारोबारी ने अपने माल के पूर्तिकर्ता से जितना भी माल खरीदा है उसका पूरा ब्यौरा FORM GSTR-2 के माध्यम से GST के पोर्टल पर देना होगा. इसके अलावा FORM GSTR-2A के माध्यम से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी या सुधार को FORM GSTR-2 में जोड़ सकते है. प्रत्येक माह कि १७ तारीख़ को FORM GSTR-1A के माध्यम से कारोबारी को आपूर्तिकर्ता को बाहरी आपूर्ति के वह आंकड़े उपलब्ध करवाएं जायेंगे जो कि प्राप्तकर्ता ने FORM GSTR-2  में कोई अतिरिक्त सुधार करवाया है.

FORM GSTR-4 : वह कारोबारी जो महीने में कम से कम २० लाख से ज्यादा का कारोबार करता है उसको प्रत्येक तिमाही के ख़त्म होने के अगले माह की १८ तारीख़ को FORM GSTR-4 के माध्यम से रिटर्न भरना होगा. एक बात का विशेष ध्यान रखे कि इसमें आपको पूरे तीनों महीनो की रिटर्न भरनी होगी.

FORM GSTR MIS-1 यदि कोई कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करना चाहता है तो वह FORM GSTR MIS-1 के माध्यम से कर सकता है.

FORM GSTR-3A: जिस भी रजिस्टर्ड करदाता ने समय पर अपनी GST रिटर्न नहीं भरी है FORM GSTR-3A के माध्यम से धारा २७ और धारा ३१ के तहत उस कारोबारी को नोटिस भेजा जायेगा.

GSTR-5  जो व्यापारी भारत में नहीं रहते है अर्थात विदेश से आने वाले व्यापारियों को FORM GSTR-5 के माध्यम से GST के रिटर्न हर माह की २० तारीख़ को भरना अनिवार्य होगा.

FORM GSTR-7 : जो भी कारोबारी अपने कारोबार के टैक्स रिटर्न को GST में फाइल करना चाहते है उन्हें हर माह की १० तारीख़  को FORM GSTR-7 भरना होगा. जिस भी मूल्य पर कारोबारी का स्तोत्र पर कर काटा गया है उसे हर माह FORM GSTR-7A भरना होगा.

FORM GSTR-8: जो लोग भी ई-कॉमर्स के कारोबार में है उन्हें FORM GSTR-8 के द्वारा अपनी आपूर्ति का ब्यौरा देना होगा और कर संग्रहकर्ता आपको कुल जमा किये गए कर की राशि बताएँगे. ये कर भी आपको हर माह की १० तारीख़ को ही जमा करना है.

FORM GSTR-9:  जो भी कारोबारी कराधीन के दायरे में आता है उसे FORM GSTR-9 भरना होगा.

FORM GSTR-9C : जिस भी कारोबारी का सालाना टर्नओवर २ करोड़ से अधिक है तो उसे FORM GSTR-9C देना होगा. इस फॉर्म में उसे अपने खातो के वार्षिक लेखा रिपोर्ट और समाधान विवरण अगले वित्त वर्ष की समाप्ति को प्रस्तुत करना होगा.

FORM GSTR-10: ऐसे करदाता जिनका पंजीयन किसी कारणवश रद्द कर दिया गया है उन्हें FORM GSTR-10 के माध्यम से पंजीयन रद्द किये जाने के ३ माह के भीतर अपने भुगतान कियी गए कर और भुगतान योग्य कर का संपूर्ण ब्यौरा देना होगा.

आपको बताते चले कि GST के लागू होने के बाद से छोटे-बड़े कारोबारियों को एक वित्त वर्ष में ३७ रिटर्न भरने होंगे.

GSTR -1,GSTR-2, एवं GSTR-3:  इसके अंतर्गत GSTR १,२, एवं ३ के रिटर्न मासिक भरें जायेंगे और GSTR 9 हर साल भरना होगा. अर्थात महीने में ३ और सालाना देखा जाए तो ३६ और एक वित्त वर्ष की समाप्ति पर भरना होगा.

दोस्तों अब हम  बताएँगे कि GST से सम्बंधित आपको कौन-कौन से खाते एवं अन्य रिकार्ड्स है जिन्हें आपको अनिवार्य रूप से बनाये रखना है. सर्वप्रथम तो आपको उत्पादन शुल्क से सम्बंधित कुछ सामान्य लेखों का विवरण बनाकर रखना होगा जैसे कि बही क्रमांक-1 जिसमे कि आपको दैनिक उत्पादों का स्टॉक खाता बनाना होगा. रसीद या कच्चा माल जारी होने की बही, बीजक बही और नियत कार्य की बही. सेवा कर के अंतर्गत आपको  बीजक बही और रसीद बही तथा नामे-चिट्ठी और जमा-चिट्ठी के साथ सेनवैट क्रेडिट बही भी बनाना होगा.

वैट के अंतर्गत माल की खरीदी और विक्रय से सम्बंधित बही, स्टॉक बही बनाना होगा जिसमे आपको इनपुट और आउटपुट कर को शामिल करना होगा.

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जीएसटी (GST) रिटर्न कैसे भरे ? – GST return kaise bhare live demo hindi was last modified: January 17th, 2018 by जनहित में जारी

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