प्रधानमंत्री पद के 50 रोचक तथ्य – देश के किस राज्य ने सबसे अधिक प्रधानमंत्री दिए हैं ?

प्रधानमंत्री पद के 50 रोचक तथ्य

२. प्रधानमंत्री पद के ५० रोचक तथ्य

प्रधानमंत्री पद देश का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा पद होता है. इस पद की महत्ता का पता इसी से चलता है कि इसका चुनाव जनता जनार्दन के मतानुसार होता है. प्रधानमंत्री संघ कार्यपालिका का प्रमुख होता है और मंत्रिपरिषद का प्रधान भी होता है. आइये आज हम प्रधानमंत्री पद से जुड़े कुछ रोचक मजेदार तथ्यों को जानते है:-

  1. संविधान के अनुच्छेद ७५ में स्पष्ट रूप से ये उल्लेख है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी. संसद में अपने कार्यो की सम्पूर्ण जवाबदारी उसी पर होती है.
  2. हालाँकि संविधान के अनुच्छेद ७५ में ये प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त कर सकता है जो कि लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होता है.
  3. भारतीय संविधान के अनुसार भारत का प्रधानमंत्री केंद्र सरकार के मंत्री परिषद् का प्रमुख तो  होता ही है लेकिन वो राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार भी होता है.
  4. प्रधानमंत्री अपनी स्वेच्छा से मंत्री परिषद् का गठन करता है और उसकी मृत्यु या पदत्याग की दशा में समस्त मंत्रिपरिषद को अपना अपना पद छोड़ना पड़ता है.
  5. क्या आप जानते है हमारे भारत देश के प्रधानमंत्री को औपचारिक तौर पर माननीय और  राजनयिक तौर पर महामहिम से संबोधित किया जाता है.
  6. वैसे तो प्रधानमंत्री का कार्यकाल ५ वर्ष का होता है यदि कार्यकाल समाप्ति के पूर्व ही सभा भंग न की जाए तो.  
  7. प्रधानमंत्री पद पर वैसे तो कोई भी समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है लेकिन कोई भी व्यक्ति तभी तक इस पद पर रहता है जब तक कि लोकसभा में बहुमत उसके पक्ष में होता है.
  8. संविधान में राष्ट्रपति के समस्त कार्यकारी अधिकारों को अमल में लाने की शाक्ति लोकतान्त्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री को ही दी गई है और संविधान के भाग ५ के विभिन्न अनुच्छेदों में प्रधानमंत्री पद के संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया है.
  9. हमारा संविधान वैसे तो प्रधानमंत्री पद के लिए कोई विशेष अर्हताए निर्दिष्ट नहीं करता है लेकिन एक मुख्य आवश्यकता जरूर निर्धारित करता है कि प्रधानमंत्री के पास लोकसभा अथवा राज्यसभा की सदस्यता होनी चाहिए.
  10. प्रधानमंत्री को पद की शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलवाई जाती है. पद पर नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री को दो शपथ लेनी होती है और ये दोनों शपथ भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची के अनुच्छेद ७५(४), ९९, १२४(६), १४८(२), १६४(३), १८८ और २१९ में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है.
  11. क्या आप जानते है प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने कार्यकाल के बीच में ही पदत्याग किया था.
  12. प्रधानमंत्री का कार्यकाल ५ वर्ष का होता है जिसके बाद फिर से नए चुनाव करवाए जाते है. नई सभा प्रधानमंत्री के पक्ष में फिर से विश्वासमत पारित करती है. यदि नई सभा प्रधानमंत्री में अविश्वासमत पारित करती है तो फिर प्रधानमंत्री का कार्यकाल समाप्त हो जाता है.
  13. यदि किसी भी कारणवश लोकसभा सरकार के विरोध में अविश्वासमत पारित करती है या फिर संसद में प्रधानमंत्री की सदस्यता शुन्य घोषित हो जाए तो फिर प्रधानमन्त्री राष्ट्रपति को किसी भी समय अपने पद का इस्तीफ़ा एक लिखित त्यागपत्र के माध्यम से दे सकता है.
  14. प्रधानमंत्री पर किसी भी प्रकार की कोई भी संवैधानिक बाध्यता नहीं होती है. यदि प्रधानमंत्री अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों से उनके कार्यो को लेकर यदि असंतुष्ट होता है तो वो उनसे इस्तीफा भी ले सकता है और यदि वह मंत्री इस्तीफ़ा देने से इंकार करता है तो प्रधानमंत्री राष्ट्रपति से कह कर उसे पद से निलंबित भी करवा सकता है.
  15. क्या आप जानते है कि प्रधानमंत्री के ही परामर्श पर राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद के मंत्रियों के नियुक्ति करता है.
  16. प्रधानमंत्री पद कितना महत्वपूर्ण और शक्तिशाली होता है इसका अंदाजा तो इसी बात से चलता है कि मंत्रिपरिषद की नियुक्ति से पहले ही प्रधानमंत्री की नियुक्ति हो जाती है. और तो और प्रधानमंत्री ही मंत्रिपरिषद का निर्माता होता है.
  17. प्रधानमंत्री ही अपने मंत्रिपरिषद के मंत्रियों के बीच कार्यो का बंटवारा करता है. और तो और यदि वो अपने मंत्रियों के कार्यों से संतुष्ट नहीं होता है तो वह मंत्रिपरिषद को भंग भी कर सकता है.
  18. प्रधानमंत्री को अपने मंत्रिपरिषद का जन्मदाता, जीवनदाता और मृत्युदाता तीनो का केंद्रबिंदु भी कहा जाता है. उसे सभी प्रकार के विभागों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार भी होता है.

  19. हमारा देश एक प्रजातंत्रात्मक राष्ट्र है और प्रजातंत्रात्मक विधि के अनुसार प्रधानमंत्री को लोकसभा का सदस्य होना अनिवार्य है लेकिन किसी विशेष परिस्थिति में राज्य सभा का व्यक्ति भी प्रधानमंत्री हो सकता है. जैसे कि राज्य सभा का  सदस्य होने के बावजूद भी इंदिरा गाँधी और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया.
  20. प्रधानमंत्री अत्यंत ही शक्तिशाली व्यक्ति होता है और देश का वास्तविक शासक भी वही  होता है.
  21. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की सभाओ में सभापति के पद पर भी आसीन होता है और मंत्रिपरिषद के कार्यों और निर्णयों में उसका सबसे अधिक हाथ होता है.
  22. प्रधानमंत्री अपने मंत्रिपरिषद के समस्त कार्यों और निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देता है. वह राष्ट्रपति, लोकसभा और मंत्रिपरिषद के बीच एक सेतु का कार्य करता है. कोई भी अन्य मंत्री राष्ट्रपति को किसी भी बात की सूचना नहीं दे सकता है और यदि वो ऐसा करता है तो उसे सबसे पहले इस बात की जानकारी प्रधानमंत्री को देना होगा.

  23. राज्यसभा, राजदूत, संघीय लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य उच्च पदाधिकारियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से सलाह-मशविरा करके ही करता है.
  24. संसद सभा में अपने नीति-निर्णयों और कार्यों एवं महत्वपूर्ण प्रश्नों से सम्बंधित समस्त वक्तव्यों को सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री ही देता है. इसीलिए तो उसे सरकार का प्रमुख वक्ता भी कहा जाता है.
  25. पुरे देश के शासन पर उसका ही एकाधिकार होता है और देश के अंदरूनी और बाहरी नीतियों का निर्धारण भी वही करता है.
  26. यदि देश में किसी भी तरह का कोई संकट आ जाता है तो इस संकटकाल की अवधि में प्रधानमंत्री का अधिकार और ताक़त और भी अधिक बढ़ जाती है. ऐसी परिस्थिति में राष्ट्रपति अपने समस्त संकटकालीन अधिकारों का प्रयोग प्रधानमंत्री के परामर्श से ही करता है.
  27. प्रधानमंत्री को यदि तारों के बीच में चन्द्रमा कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. उसकी शक्तियां असीमित होती है. उसके कार्य और जिम्मेदारीयां बहुत ही महत्वपूर्ण होते है.
  28. डॉ. बी आर आम्बेडकर जी  ने कहा है कि शक्तियों एवं अधिकारों की यदि बात की जाए तो भारत के प्रधानमंत्री की तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति से की जा सकती है.

  29. भारत देश के रक्षा बलों का प्रमुख वैसे तो राष्ट्रपति होता है लेकिन वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री के हाथ में होती है. राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा से सम्बंधित सभी महत्त्वपूर्ण विषयों पर सलाह-मशविरा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् प्रधानमंत्री से ही करती है.  
  30. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् का अध्यक्ष होता है और उसकी नियुक्ति भारत के प्रधानमंत्री द्वारा ही किया जाता है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि सुरक्षा समिति जो भी सिफारिशें प्रधानमंत्री को भेजती है या प्रस्तुत करती है उसका अंतिम निर्णय भी प्रधानमंत्री को ही करना होता है.

  31.   भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और परमाणु शक्ति की कमान भी प्रधानमंत्री के ही हाथो में होती है. भारत के परमाणु कमान प्राधिकरण का अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही होता है.
  32. आज़ादी से पहले देश में अलग-अलग राजा हुआ करते थे जो कि अपने हिसाब से शासन चलाया करते थे लेकिन आजादी के बाद देश को एकजुट करने और देश में एक ही लोकतान्त्रिक सत्ता के लिए पहली बार प्रधानमंत्री का चयन किया गया.
  33. प्रधानमंत्री को अपनी सरकार बनाने के लिए लोकसभा में हमेशा बहुमत बनाए रखना होता है लेकिन यदि उसे राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित बहुमत प्राप्त नहीं होता है तो प्रधानमंत्री की सरकार गिर भी सकती है.

  34. प्रधानमंत्री के लिए ये अनिवार्य है कि पद मिलने के ६ माह के भीतर ही उसे संसद की सदस्यता लेनी पड़ती है. सरकार का प्रमुख तो प्रधानमंत्री ही होता है लेकिन उस पर कार्यपालिका शक्ति की जिम्मेदारी भी होती है.
  35. देश के सभी मुख्य कामों में प्रधानमंत्री की उपस्थिति अनिवार्य होती है. देशव्यापी तौर पर होने वाली बड़ी-बड़ी सभाओ में चाहे वो अंतर्राष्ट्रीय ही क्यों न हो प्रधानमंत्री को उसमे हिस्सा लेना ही पड़ता है.
  36. प्रधानमंत्री को भारत देश का नागरिक तो होना ही चाहिए लेकिन प्रधानमंत्री नियुक्त होने के पश्चात् उसे अपनी प्राइवेट और गवर्नमेंट किसी भी क्षेत्र से इस्तीफा देना अनिवार्य हो जाता है.
  37. यदि प्रधानमंत्री पद का दावेदार लोकसभा का सदस्य है तो उसकी उम्र २५ वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए और यदि वो राज्यसभा का सदस्य है तो उसकी उम्र ३० वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए.

  38. प्रधानमंत्री नीति आयोग, राष्ट्रीय विकास परिषद्, राष्ट्रीय एकता परिषद्, अंतर्राज्यीय परिषद् और राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद् का अध्यक्ष होता है.
  39. प्रधानमंत्री ही वह शख्स होता है जो अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत देश का प्रतिनिधित्व करता है और तो और अन्य गैर गठबंधन देशो और सम्मेलनों में भी प्रधानमंत्री ही देश का प्रतिनिधित्व करता है.
  40. प्रधानमंत्री ही एकमात्र ऐसा व्यक्ति होता है जो अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर पुरे देश की परिस्थितियों को बदल सकता है.
  41. प्रधानमंत्री के पास ये अधिकार भी होता है कि यदि मंत्रिमंडल फैसले लेने में देरी कर रहा है या मंत्रिमंडल की निर्णय प्रक्रिया बहुत ही धीमी है तो फिर प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की धीमी प्रक्रिया पर निर्भर न होकर कुछ वफादार सलाहकारों का एक छोटे से समूह का गठन कर सकता है जो कि तत्काल फैसले ले सकता है.

  42. प्रधानमंत्री देश का सेवक होता है जिसका मुख्य कार्य देश की सेवा करना होता है. प्रधानमंत्री देश का वह शासन अधिकारी होता है जो कि राष्ट्र को भारत के संविधान के अनुसार नियंत्रित करने की शक्ति रखता है.
  43. भारत में लगभग २९ राज्य और ७ केंद्र शासित प्रदेश है और सभी राज्यों का मुखिया प्रधानमंत्री ही होता है.
  44. प्रधानमंत्री अपने सारे कामकाज को देश की राजधानी दिल्ली से ही नियंत्रित करता है और तो और पूरा का पूरा गणराज्य ही प्रधानमंत्री के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
  45. क्या आप जानते है कि संविधान द्वारा बनाये गए नियमो के आधार पर सरकार की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति सिर्फ नाममात्र का कार्यकारी प्रमुख होता है. उसके वास्तविक कार्यकारी अधिकार प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को ही प्राप्त होते है.
  46. प्रधानमंत्री को २० लाख रूपए वार्षिक वेतन मिलता है. साथ ही साथ उन्हें मुफ्त आवास, यात्रा, चिकित्सा, टेलीफोन आदि की सरकारी सुविधाए भी प्राप्त होती है. इसके अलावा अन्य भत्ते के रूप में उसे निर्वाचन क्षेत्र, आकस्मिक खर्च, अन्य खर्चे एवं डी ए भी मिलता है.

  47. राष्ट्रहित में विदेश नीतिया प्रधानमंत्री के द्वारा ही बनाई जाती है. इसके अलावा सत्ताधारी दल का प्रमुख भी प्रधानमंत्री ही होता है.
  48. जल, थल और वायु सेनाओं का राजनैतिक प्रमुख और केंद्र सरकार का मुख्य प्रवक्ता भी प्रधानमंत्री ही होता है.
  49. मंत्रिपरिषद के गठन, उसके परिवर्तन, विभागों का बंटवारा और उनके कार्यो तथा मंत्रिपरिषद के बीच समन्वय स्थापित करने का भार प्रधानमंत्री के कंधो पर ही होता है.
  50. प्रधानमंत्री से सम्बंधित सबसे दिलचस्प बात यह है कि यदि वह लोकसभा का सदस्य है तो वह लोकसभा का नेतृत्व करेगा और यदि वह राज्यसभा का सदस्य है तो राज्यसभा का नेतृत्व करेगा.    

  51. देश के Uttar Pardesh राज्य ने सबसे अधिक प्रधानमंत्री दिए हैं

 

 

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