कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है सैनिकों के रक्त से आबाद हिंदुस्तान है तिलक किया मस्तक चूमा , बोली ये ले कफ़न तुम्हारा मैं माँ हूँ पर बाद में, पहले बेटा वतन तुम्हारा हँसते हँसते सीने पर वह अपने गोलीखाता प्राण न्योछावर कर सीमा पर, माँ का कर्ज चुकाता तू शहीद हुआ तो ना जाने कैसे तेरी माँ सोयी होगी तुझे लगने वाली गोली भी सौ बार रोयी होगी बस ये बात हवाओं को बताए रखना रोशनी होगी चिरागो को जलाए रखना लहू देकर जुस्की हिफाजत की शहीदों ने उस तिरंगे को सदा दिल में बसाए रखना कुछ हाथ से मेरे निकल गया वो पलक झपक के छिप गया फ़िर लाश बिछ गयी लाखो की सब पलक झपक के बदल गया जब रिश्ते राख में बदल गये इंसानियत का दिल दहल गया मैं पूँछ पूँछ के हार गया क्यू मेरा भरत बदल गया हाथ से तिरंगा नीचे गिरने दिया ना तूने कोई गोली पीठ पर ना खाई है देश का जो मस्तक झुके ना, ऐसा काम किया दुध ना लजाया मेरा, कोख ना लजायी है
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